ऐप पर डिस्कस होता है प्लान, हर बदमाश को सौंपा जाता है अलग काम, सुपारी लेने से हत्या करने तक ऐसे काम करता है लॉरेंस गैंग
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मोबाइल ऐप से की जाती है प्लानिंग, कौन सा गैंगस्टर क्या काम करेगा 

 बदमाश को सौंपा जाता है अलग काम, सुपारी लेने से हत्या करने तक ऐसे काम करता है लॉरेंस गैंग

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ऐप पर डिस्कस होता है प्लान, हर बदमाश को सौंपा जाता है अलग काम, सुपारी लेने से हत्या करने तक ऐसे काम करता है लॉरेंस गैंग

Bishnoi Samachar Network Delhi पत्रकार अम्बर बाजपेयी की कवरेज. जयपुर में सुखदेव सिंह गोगामेड़ी को मारने के लिए शूटरों ने फुलप्रूफ प्लान बनाया था. अब तक पुलिस इन हत्यारों का सुराग नहीं लगा पाई है. बताया जाता है कि लॉरेंस गैंग में सैकड़ों शार्प शूटर हैं जो एक इशारे पर टारगेट को किल करने के लिए निकल पकड़ते हैं, ये ऑनलाइन प्लान डिस्कस करते हैं और उसे अंजाम तक पहुंचाते हैं।

जयपुर में सुखदेव सिंह गोगामेड़ी को मारने के लिए शूटरों ने एक-दो नहीं पूरे 17 राउंड फायरिंग की. सबसे पहली गोली गोगोमेड़ी को ही मारी गई. इसके बाद तो जैसे पल भर में ही पूरा कमरा गोलियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा. सीसीटीवी फुटेज में जो नजारा दिखा वो किसी बॉलीवुड फिल्म के सीन की तरह ही था. हमलावरों का मोटिव गोगामेड़ी को मारना ही था इसका सबूत वो गोली है जो जाते-जाते हमलावरों ने उनके सिर में मारी थी. हमलावरों के चेहरे पर न नकाब था और न ही उन्हें सीसीटीवी फुटेज का डर. हत्या की प्लानिंग इतनी फुलप्रूफ थी कि अब तक पुलिस हमलावरों के बारे में कोई सुराग नही लगा पाई है।

जयपुर में सुखदेव सिंह गोगामेड़ी को मारने के लिए शूटरों ने एक-दो नहीं पूरे 17 राउंड फायरिंग की. सबसे पहली गोली गोगोमेड़ी को ही मारी गई. इसके बाद तो जैसे पल भर में ही पूरा कमरा गोलियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा. सीसीटीवी फुटेज में जो नजारा दिखा वो किसी बॉलीवुड फिल्म के सीन की तरह ही था. हमलावरों का मोटिव गोगामेड़ी को मारना ही था इसका सबूत वो गोली है जो जाते-जाते हमलावरों ने उनके सिर में मारी थी. हमलावरों के चेहरे पर न नकाब था और न ही उन्हें सीसीटीवी फुटेज का डर. हत्या की प्लानिंग इतनी फुलप्रूफ थी कि अब तक पुलिस हमलावरों के बारे में कोई सुराग नही लगा पाई है.

गोगामेड़ी की हत्या की जिम्मेदारी लेने वाला गैंगस्टर रोहित गोदारा लॉरेंस बिश्नोई और गोल्ड़ी बराड़ गिरोह का है. इस गैंग के काम करने का अपना तरीका है. सुपारी लेने से लेकर शिकार को खत्म करने तक यह गैंग एक अलग पैटर्न पर काम करता है. यही कारण हैं कि ज्यादादर मामलों में पुलिस को तब पता चलता है जब गैंग का कोई सदस्य खुद इसकी जिम्मेदारी लेता है. गोगामेड़ी की हत्या के मामले में भी ठीक ऐसा ही हुआ है.

ऐसे रची जाती है पूरी साजिश

लॉरेंस बिश्नोई गैंग में सैकड़ों शार्प शूटर हैं, सबसे खास बात ये है कि ये शूटर कभी किसी दूसरे के संपर्क में नहीं रहते. जब कोई कोई टारगेट तय होता है तो उस टारगेट के आसपास के शूटर एक्टिव किए जाते हैं, ये शूटर सिर्फ अपने से ऊपर एक बदमाश को जानता है. जब कत्ल की प्लानिंग होती है तो शूटर एक-दूसरे से कनेक्ट हो तो हैं, लेकिन ये सारी प्लानिंग एक ऐप के जरिए की जाती है. हर सदस्य का एक कोड वर्ड होता है, ताकि किसी को किसी का असली नाम पता न चले. इसी प्लानिंग में ये तय हो जाता है कि कौन टारगेट की रेकी करेगा, हथियार कौन लाएगा, गाड़ियों का इंतजाम कौन करेगा. शूटर कहां भागेंगे और कहां पनाह लेंगे. दावा तो यहां तक किया जाता है कि कई बार साथ गए शूटर भी एक-दूसरे के बारे में ज्यादा नहीं जानते हैं.

जेल से गैंग चलाता है लॉरेंस बिश्नोई

लॉरेंस बिश्नोई जेल से ही बैठकर पूरे गैंग को चलाता है. उसने गैंगस्टरों की ऐसी टोली तैयार की है जो एक ही इशारे पर टारगेट को मारने निकल पड़ते हैं. बिश्नोई कब और कैसे निर्देश बाहर तक भेजता है, इसका पता अब तक जांच एजेंसियां भी नहीं लगा पाई हैं. बताया तो यहां तक जाता है कि दुनिया के पांच देशों में इस गैंग का आतंक है, इनमें ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रिया, दुबई और मैक्सिको शामिल हैं. अगर देश की बात की जाए तो खासतौर से उत्तर भारत, यानी पंजाब, दिल्ली एनसीआर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और बिहार तक यह गैंग वारदातें करता है. माना जाता है कि हत्या और उगाही ही इस गैंग का मुख्य काम है.

इन चार पहियों पर टिका लॉरेंस गैंग

  1. गोल्डी बराड़: लॉरेंस के बाद गैंग का सबसे प्रमुख गैंगस्टर गोल्डी बराड़ है, जिसके ऊपर विदेश में गैंग फैलाने की जिम्मेवारी है. इसका असली नाम सतविंदर है. बताया जाता है कि अपने भाई की हत्या के बाद गोल्डी लॉरेंस के गैंग ममें शामिल हुआ था. भाई की हत्या का बदला देने के बाद वह कनाडा चला गया और वहीं पर गैंग को बढ़ाने लगा.
  2. काला जठेड़ी: दिल्ली का यह गैंगस्टर 10 साल से ज्यादा समय से सक्रिय है. पहले यह अकेले काम करता था, लेकिन बाद में बिश्नोई गैंग से जुड़ गया. बताया जाता है कि बॉर्डर पार सारे कनेक्शन यही संभालता है. फिलहाल ये जेल में है, लेकिन फिर भी बाहरी दुनिया से इसे कांटेक्ट हैं.
  3. संपत नेहरा: बिश्नोई गैंग के एक ओर चेहरे का काम संपत नेहरा है. एक जमाने में यह एथलीट हुआ करता था, लेकिन बाद में अपराध की दुनिया में शामिल हो गया. संपत राजस्थान का रहने वाला है, लेकिन उसकी पढ़ाई लिखाई पंजाब में हुई थी.
  4. अनमोल बिश्नोई: लॉरेंस का भाई अनमोल ऑस्ट्रिया में है, वह हत्या के कई मामलों का आरोपी है. पुलिस लगातार उसकी तलाश में जुटी है, माना जाता है कि विदेश में गोल्डी बराड़ के बाद अनमोल ही है जो लॉरेंस गैंग की पूरी कमान संभालता है.