राजस्थान डोडा पोस्त के ठेके सम्बंधित जानकारी, आबकारी विभाग का मामला
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राजस्थान डोडा पोस्त के ठेके सम्बंधित जानकारी, आबकारी विभाग का मामला

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राजस्थान डोडा पोस्त के ठेके सम्बंधित जानकारी, आबकारी विभाग का मामला

Bishnoi Samachar Digital Desk नई दिल्ली- राजस्थान में पिछे कुछ घंटों से एक आबकारी विभाग का लेटर WhatsApp पर वायरल हो रहा है जिस में डोडा पोस्त पर लगा प्रतिबंध हटेगा ओर 120 ठेके खुलेगे ऐसी जानकारी शेयर हो रही है। 

हालांकि आबकारी विभाग से ईस बारे में हमने जानकारी ली उनका जबाब आया की यह लेकर फर्जी है ओर हम जांच कर रहे ऐसी हरकत करने वाले का जल्द होगा खुलासा।

राजस्थान प्रदेश में संचालित हो रहे थे डोडा पोस्त के 264 ठेके बंद हो गये थे । कोर्ट की फटकार के बाद राज्य सरकार ने नशे के इस कारोबार से हाथ खींच लिए थे। 

डोडा के ठेके अवश्य बंद तो हो गये थे  लेकिन इस नशे की आदत की शिकार हो चुके बंधाणी( वे लोग जो नियमित इसका सेवन करते है) इसे अभी तक छोड़ नहीं पाए है। ऐसे में ठेके भले ही बंद हो गये हो, लेकिन मारवाड़ के ग्रामीण क्षेत्र में फिलहाल डोडा पोस्त की मनुहार थमने के आसार कम ही नजर आ रहे है। ।

राजस्थान डोडा पोस्त के ठेके सम्बंधित जानकारी, आबकारी विभाग का मामला

इस कारण बंद किए थे ठेके 

राजस्थान सरकार ने उस समय तय किया था कि 31 मार्च 2016 के बाद प्रदेश में किसी दुकान को डोडा पोस्त बेचने का ठेका नहीं दिया जाए उस समय के बाद ठेके बंद है आज तक 


- हाईकोर्ट के इस निर्णय के खिलाफ डोडा पोस्त विक्रेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।
- उस समय प्रदेश में उन्नीस हजार से अधिक लोग डोडा पोस्त खरीदने के परमिट धारक थे।
- अधिकांश परमिट धारक मारवाड़ के जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर व नागौर में इसका सर्वाधिक प्रचलन था।
- परमिट धारकों को इन ठेकों के माध्यम से डोडा बेचा जाता रहा था।
- कहने को तो महज उन्नीस हजार परमिट धारक थे, लेकिन वास्तव में डोडा पोस्त का नियमित सेवन करने वाले बंधाणी लाखों की संख्या में थे ओर आज भी है।
- राज्य सरकार ने लोगों को इसकी लत छुड़ाने के लिए एक वर्ष में नया सवेरा नाम से 212 स्थान पर शिविर लगा बहुत लोगों को इस नशे से मुक्त कराया।

क्या है डोडा पोस्त
- अफीम के पौधे पर लगने वाले फल को डोडा कहा जाता है।
- इसमें से अफीम को निकाल लिया जाता है। अफीम को निकालने के बावजूद इसका कुछ अंश उसमें चिपका रह जाता है।
- डोडे को सूखा दिया जाता है। इन टुकड़ों को डोडा पोस्त कहते है।
- डोडा पोस्त को कूट कर बारीक बना दिया जाता है। पानी में थोड़ी देर तक भिगो कर रखने के बाद इसे छान कर पिया जाता है।
- इसको पीने से नशा होता है।

कहां होती है अफीम की खेती
- अफीम की खेती करने के लिए लाइसेंस प्राप्त करना होता है। यह लाइसेंस केन्द्र सरकार जारी करती है।
- केन्द्र सरकार इसके लिए क्षेत्र चिह्नित कर अपनी जरुरत के अनुसार रकबा तय कर लाइसेंस जारी करती है।
- पूर्व में 2014 में केन्द्रीय वित्त मंत्रालय ने क्षेत्र नोटिफाइड की अधिसूचना जारी की थी।

- इसके तहत मध्यप्रदेश के तीन, राजस्थान के सात व उत्तर प्रदेश के छह जिलों में अफीम की खेती करने का लाइसेंस प्रदान किया जाता है।
मारवाड़ में इसकी मनुहार बगैर अधूरा है कोई आयोजन
- मारवाड़ के ग्रामीण क्षेत्रों में अफीम या डोडा पोस्त की मनुहार करने का परम्परा रही है।
- घर में शादी हो या फिर किसी की मौत। इस नशे की जमकर मनुहार की जाती है।
- हालांकि कई जातियों व क्षेत्रों में समय-समय पर इस मनुहार पर रोक लगाई जाती रही है, लेकिन यह लम्बे समय तक प्रभावी नहीं रह पाती।
- शादी या मौत के बाद होने वाली बैठकों में एक लाख से तीन लाख तक का डोडा पोस्त व अफीम की खपत होना सामान्य बात है।

ठेके बंद होने से जमकर होती है तस्करी

- मारवाड़ में अफीम व डोडा पोस्त की जमकर तस्करी होती रही है।
- डोडा पोस्त की सरकारी दुकाने ठेके बंद हुऐ तब से कई गुना आवक तस्करी के माध्यम से होती है।
- अधिकांश तस्कर मध्यप्रदेश व इससे सटे राजस्थान के जिलों से अफीम व डोडा पोस्त लेकर आते है।
- कुछ वर्ष से बांग्लादेश की सीमा से सटे पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों में अवैध रूप से अफीम की खेती की जा रही है।
- ऐसे में तस्करों ने सस्ता पड़ने के कारण वहां से अफीम व डोडा पोस्त लाना शुरू कर दिया।
हाल ही इस तरह के कई मामले पकड़ में आने के बाद अफीम के नए क्षेत्र की जानकारी मिली।