जोधपुर से अयोध्या के लिए भारत की पहली आस्था स्पेशल ट्रेन हुई रवाना
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जोधपुर से अयोध्या के लिए भारत की पहली आस्था स्पेशल ट्रेन हुई रवाना

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जोधपुर से अयोध्या के लिए भारत की पहली आस्था स्पेशल ट्रेन हुई रवाना

Bishnoi Samachar Digital Desk नई दिल्ली- जोधपुर से अयोध्या के लिए भारत की पहली आस्था स्पेशल ट्रेन आज दोपहर को भगत की कोठी रेलवे स्टेशन से रवाना हुई। ये ट्रेन 1446 यात्रियों को लेकर सोमवार को अयोध्या पहुचेगी।

इन सभी यात्रियों को जोधपुर के भगत की कोठी रेलवे स्टेशन से रवाना किया। इससे पहले सभी रामभक्तों का तिलक और भगवा दुपट्टा पहना कर स्वागत किया गया। यात्रियों की सुरक्षा के लिए हर कोच में पुलिस और आरपीएफ के जवानों को भी तैनात किया गया है।

दरअसल, राम भक्तों के लिए देशभर से 1 फरवरी से आस्था स्पेशल ट्रेन चलनी थी। लेकिन, रेलवे डीआरएम पंकज कुमार सिंह ने बताया कि जोधपुर से देश की पहली ट्रेन को रविवार दोपहर 12:15 बजे रवाना किया गया। इस आस्था स्पेशल ट्रेन को आईआरसीटीसी के माध्यम से बुक करवाया गया था। यात्रियों के लिए बुकिंग आधार कार्ड के माध्यम से की गई थी।

24 कोच लेकर हुई रवाना, हर कोच में सिक्योरिटी

24 कोच लेकर रवाना हुई ट्रेन जोधपुर से अयोध्या तक जाने वाली ट्रेन मेड़ता रोड, डेगाना, खाटू होते हुए अयोध्या तक पहुंचेगी। रास्ते में कुल 20 स्टेशन आएंगे। मैं 16 स्लीपर 6 एसी कोच और दो एसएलआर कोच है, जो 1250 किलोमीटर की यात्रा तय कर 26 घंटे 15 मिनट में सोमवार दोपहर 2:30 पर अयोध्या धाम पहुंचेगी।

ट्रेन में यात्रियों की सुरक्षा के लिए एक सब इंस्पेक्टर के साथ 6 पुलिस और आरपीएफ जवानों को तैनात किया गया है, जो हर कोच में मौजूद रहेंगे। इनमें से 2 महिला कॉन्स्टेबल भी है।

ट्रेन में दर्शन के लिए जा रहे बाड़मेर के कारसेवक बाबूलाल ने बताया कि जिस समय 1990 की कार सेवा में वह अयोध्या के लिए गए थे उस समय मुलायम सिंह की सरकार ने उन पर लाठियां बरसाई थी। हमारे साथ अत्याचार किया गया था। मैं अपने 20 दिन की बच्ची को ससुराल में छोड़कर कारसेवा के लिए गया था।

वहां के हालात बहुत ही भयावह थे। और हमें ऐसा लग रहा था मंदिर नहीं बनेगा, लेकिन हमारे जिंदा रहते हमारी आंखों के सामने प्रभु श्री राम का मंदिर बनकर तैयार हो चुका है और अब दर्शन के लिए जा रहे हैं तो मन में बहुत उत्साह है जिसे हम शब्दों में बयां नहीं कर पा रहे हैं। ये जीवन का सबसे स्वर्णिम पल है।

कारसेवा में शामिल एक कार सेवक ने बताया हमें इटावा में रोक दिया गया था। हमारे साथ एक स्वयंसेवक थे जिसे पुलिस वालों ने पूछा था बाबा जी कहां जा रहे हो तो उन्होंने कहा जहां राम की मर्जी होगी वहां जाएंगे। इस पर पुलिस वालों ने उन्हें यह कहकर ट्रेन से उतार दिया कि राम की मर्जी यही है कि आप अयोध्या मत जाओ यहीं रुक जाओ, लेकिन आज इस बात को लेकर खुशी है कि हम अयोध्या दर्शन के लिए जा रहे हैं। जो प्रभु श्री राम की मर्जी से ही मंदिर बनकर तैयार हुआ है। इस दौरान वो भावुक भी हो गए। उन्होंने कहा 1992 में जब ढांचा गिराया गया था तब भी हम कारसेवा में शामिल थे। उस समय घर वालों ने यही कहा था कि वापस लौट कर आओ तो कुछ प्रसाद जरूर लेकर आना, हमने घर वालों के संकेत समझा और वहां से ढांचे के अवशेष अपने साथ लेकर आए, आज इस बात की खुशी है कि रामलला ने हमें बुलाया है।

ट्रेन के एसी कोच में सवार जैसलमेर से आए कार सेवक ओमप्रकाश ने बताया कि उस समय जब अयोध्या पहुंचे थे लेकिन कारसेवा में जाने के लिए कई समस्याएं सामने आई, लेकिन जब हमने कारसेवा की उस समय कुछ पल के लिए बारिश हुई तो लगा प्रभु की कृपा हुई है। आज इस बात के लिए खुशी है की प्रभु श्री राम ने हमें वापस बुलाया है। ये बहुत खुशी की बात है।

आस्था स्पेशल ट्रेन में जोधपुर के अलावा फलोदी जैसलमेर बाड़मेर से भी राम भक्त सवार होकर अयोध्या के लिए गए हैं। सुबह 9:00 बजे से ही रामभक्तो के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। यहां पर उन्हें रेल प्रशासन व हिंदू संगठनों के प्रतिनिधियों ने यात्रा के नियमों के बारे में बताया। सभी को उनके कोच नंबर और टिकट नंबर देकर सीट पर बिठाया गया। ट्रेन में कई कार सेवक और उनके परिवार भी शामिल हुए।