डॉ. रूमादेवी को आया अयोध्या से बुलावा,राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में होगी शामिल 
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डॉ. रूमादेवी को आया अयोध्या से बुलावा,राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में होगी शामिल 

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डॉ. रूमादेवी को आया अयोध्या से बुलावा,राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में होगी शामिल 

Bishnoi Samachar Digital Desk नई दिल्ली- अयोध्या में 22 जनवरी को राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा समारोह होगा। इसके लिए लोगों का आमंत्रण पत्र दिए जा रहे है। सीमावर्ती बाड़मेर जिला निवासी नारी शक्ति सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित डॉ. रूमादेवी को न्योता मिला है। प्राण प्रतिष्ठा समोराह में शामिल होने के लिए 20 जनवरी को बाड़मेर से रवाना होंगे। रूमादेवी राजस्थान आजीविका की ब्रांड ऐंबैस्डर है। राष्ट्रपति के हाथों नारी शक्ति सम्मान से सम्मानित हो चुकी है। बीते दिनों राष्ट्रपति ने द्रौपदी मुर्मू ने अपने हालिया राजस्थान दौरे पर जैसलमेर में अपने दिए उद्बोधन में रूमा देवी की देश -विदेश में देश का सम्मान बढ़ाने के लिए प्रशंसा की थी।

दरअसल, अयोध्या में 22 जनवरी को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह और रामलला दर्शन में शामिल होने के लिए श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट की तरफ से बाड़मेर की रूमा देवी को निमंत्रण मिला है। इस उद्घाटन समारोह में शामिल होने के लिए देश-विदेश के चुनिंदा लोगों को न्योता मिला है। इस ऐतिहासिक समारोह का हिस्सा बनने के लिए बाड़मेर की रूमा देवी को भी विशिष्ट महानुभाव श्रेणी का निमंत्रण दिया गया है। अनेक पुरस्कारों से सम्मानित रूमा देवी महिला सशक्तिकरण तथा सामाजिक कार्यों के लिए विश्व भर में जानी जाती है।

डॉ. रूमादेवी का कहना है कि नवंबर माह में ई-मेल के जरिए निमंत्रण मिला था। मेरी ओर से उसे स्वीकार कर लिया गया है। कुछ दिन पहले प्रोपर तरीके से निमंत्रण कार्ड मिला है। 20 जनवरी को बाड़मेर से जोधपुर के लिए रवाना होगी। वहां से अयोध्या जाऊंगी। मेरे लिए बहुत ही सौभाग्य की बात है कि राम मंदिर प्रतिष्ठा के दिन मुझे रामलला के दर्शन करने का मौका मिला है। मैं ट्रस्ट और सभी की आभारी हूं कि जिन्होंने मुझे बुलाया।

कौन है डॉ. रूमादेवी

बाड़मेर जिले की रहने वाली रूमा देवी, नाम जितना छोटा काम उतना ही बड़ा, जिसके सामने हर बड़ी उपलब्धि छोटी पड़ जाए। 4 साल की थीं तब मां चल बसीं, पिता ने दूसरी शादी कर ली और चाचा के पास रहने के लिए छोड़ दिया। गरीबी की गोद में पल रही रूमा को हंसने-खेलने की उम्र में खिलौनों की जगह बड़े-बड़े मटके मिले, जिन्हें सिर पर रखकर वो दूर से पानी भरकर लाती थीं। 8वीं में पढ़ाई छूट गई और 17 साल की उम्र में शादी। पहली संतान हुई वो भी बीमारी की भेंट चढ़ गई। रूमा के सामने मुश्किलों का पहाड़ था, सबकुछ बिखर गया था लेकिन उन्होंने हौसले को नहीं टूटने दिया। खुद के दम पर गरीबी से लड़ने की ठान ली और घर से ही हैंडीक्राफ्ट का काम शुरू किया। आज वे अपने आप में एक फैशन ब्रांड हैं। देश-विदेश में ख्याति है और 22 हजार महिलाओं की जिंदगी संवार रही हैं। रूमादेवी को नारी शक्ति का सर्वोच्च पुरस्कार सहित अनेक पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी है। वहीं अमेरिका सहित अलग-अलग देशों में भी उद्बोधन देने के साथ-साथ सम्मानित भी हो चुकी है।