पर्यावरण सेवकों की अनूठी पहल:- शादी समारोह व धार्मिक मेलों में जाकर लोगों को तांबे के लोटों से पिलाते हैं जल
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पर्यावरण सेवकों की अनूठी पहल:- शादी समारोह व धार्मिक मेलों में जाकर लोगों को तांबे के लोटों से पिलाते हैं जल

पर्यावरण सेवकों की अनूठी पहल:- शादी समारोह व धार्मिक मेलों में जाकर लोगों को तांबे के लोटों से पिलाते हैं जल ,दुल्हा-दुल्हन के हाथों से पौधारोपण कर दिलाते हैं पर्यावरण संरक्षण की शपथ,समारोह को रखते हैं नशा, सिंगल यूज प्लास्टिक व जूठन मुक्त ,रामङावास कला में आयोजित सामाजिक समारोह में भव्य पर्यावरण संरक्षण प्रदर्शनी लगाई

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पर्यावरण सेवकों की अनूठी पहल:- शादी समारोह व धार्मिक मेलों में जाकर लोगों को तांबे के लोटों से पिलाते हैं जल

Bishnoi Samachar Digital Desk नई दिल्ली-  पर्यावरण सेवकों की अनूठी पहल:- शादी समारोह व धार्मिक मेलों में जाकर लोगों को तांबे के लोटों से पिलाते हैं जल

दुल्हा-दुल्हन के हाथों से पौधारोपण कर दिलाते हैं पर्यावरण संरक्षण की शपथ

समारोह को रखते हैं नशा, सिंगल यूज प्लास्टिक व जूठन मुक्त 

रामङावास कला में आयोजित सामाजिक समारोह में भव्य पर्यावरण संरक्षण प्रदर्शनी लगाई

धोरीमन्ना पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित कोशिश पर्यावरण सेवक टीम प्रकृति को प्रदूषण से मुक्त करने के लिए पिछले 25 वर्षों से निस्वार्थ भाव से प्रयासरत है लेकिन अब पर्यावरण सेवक केवल एक क्षेत्र तक ही नहीं बल्कि पूरे विश्व स्तर तक इस मुहिम को पहूंचा रहे हैं टीम के राष्ट्रीय प्रभारी खमुराम बिश्नोई पर्यावरण संरक्षण के लिए पांच बार विश्व के अलग अलग स्थानों पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश पहुंचा चुके हैं। पर्यावरण सेवक व राजस्थान सरकार द्वारा राज्य स्तर पर सम्मानित शिक्षक जगदीश प्रसाद विश्नोई ने जानकारी दी कि टीम ने इसी मुहिम को आगे बढ़ाते हुए रामङावास कला के गोदारा परिवार में आयोजित सामाजिक समारोह में भव्य पर्यावरण संरक्षण प्रदर्शनी लगाकर लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया है इसके साथ-साथ विवाह समारोह में नशे की सार्वजनिक मनुहार न हो व सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल न हो इसके लिए मेजबान परिवार को कठोर हिदायत दी गई यदि ये दो शर्तें मंजूर होती है तो पर्यावरण सेवक समारोह में लोगों को जागरूक करने के लिए पर्यावरण संरक्षण प्रदर्शनी लगाते हैं,स्वच्छ भारत अभियान के तहत स्वच्छता अभियान चलाते हैं,जल संरक्षण पर भव्य प्रदर्शनी लगाते हुए मेहमानों को निस्वार्थ भाव से तांबे के लोटों से पूरे दिन जलपान कराकर नशा न करने का संकल्प दिलवाते हैंं, भोजनशाला में भोजन करते समय जूठन न छोङने का संदेश देते हुए अन्न का महत्व समझाते हैं और यदि कोई थाली में भोजन जूठा छोङ देते हैं तो उसको इकट्ठा कर व्यवस्थित करते हैं समारोह में पधारे मेहमानों व दुल्हा-दुल्हन के हाथों से पौधारोपण कराकर उनके संरक्षण की शपथ दिलाई जाती है व कपङे की थैली भेंटकर पॉलिथीन का इस्तेमाल न करने की अपील की जाती है और घर मे पानी पीने हेतु तांबे का कलश इस्तेमाल करने हेतु प्रेरित किया जाता है।

ये रहे उपस्थित

इस दौरान रामङावास कला सरपंच कोशिल्या बिश्नोई, सरपंच प्रतिनिधि अशोक सोऊ, लाम्बा सरपंच घेवरराम ईराम, बावरला सरपंच मुकनाराम सारण, बलदेवराम साऊ अखिल भारतीय जीव रक्षा बिश्नोई सभा, महेन्द्र धायल व भींयाराम सियाक पंचायत समिति सदस्य व भंवरलाल साऊ रामङावास सहित उपस्थित सभी मेहमानों ने पर्यावरण सेवकों द्वारा की गई निस्वार्थ भाव की सेवा की सराहना कर होंसला आफजाई किया।