राकेश विश्नोई ने अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो पर 510 फीट का फहराया तिरंगा
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राकेश विश्नोई ने अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो पर 510 फीट का फहराया तिरंगा

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राकेश विश्नोई ने अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो पर 510 फीट का फहराया तिरंगा

Bishnoi Samachar Digital Desk नई दिल्ली- हौसले बुलंद हो तो कुछ भी करना मुमकिन होता है, इसका ताजा उदाहरण कराड़ा डूंगरपुर के व्यवसायी और पर्वतारोही राकेश विश्नोई ने पेश किया। उन्होंने व्यापार के साथ-साथ अपने सपने को पूरा करते हुए अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो पर 510 फीट का तिरंगा फहराया है।

75वें रिपब्लिक डे और अयोध्या में श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को लेकर राकेश विश्नोई ने अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो पर तिरंगा फहराने का प्रण लिया। 500 साल के श्रीराम मंदिर के संघर्ष को नमन करते हुए और गणतंत्र दिवस को यादगार बनाने वे अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो (19341 फीट) पर चढ़े।

75वें गणतंत्र ​दिवस पर बनाया इंटरनेशनल रिकॉर्ड
विश्नोई 22 जनवरी को अफ्रीका महाद्वीप पहुंचे और 26 जनवरी को इंटरनेशनल रिकॉर्ड बनाते हुए किलिमंजारो पर 510 फीट का तिरंगा और राम ध्वज फहराया। उन्होंने -20℃ टेम्प्रेचर में कठिन मौसम का सामना करते हुए अकेले जाकर तिरंगा और रामध्वज फहरा के ये उपलब्धि हासिल की है। इसके साथ ही उन्होंने दुनियाभर में वसुधैव कुटुंबकम का संदेश दिया।

राकेश विश्नोई ने बताया कि इस मिशन के लिए उन्होंने अपने बलबूते पर वीजा और परमिशन हासिल की और चोटी फतह की। इस उपलब्धि को हासिल करने के अलावा राकेश बिशनोई ने यूरोप महाद्विप की सबसे ऊंची चोटी को भी राष्ट्रीय रिकॉर्ड के साथ फतह किया है। पर्वतारोहण के लिए विश्नोई ने रक्षा मंत्रालय के संस्थान से दक्षता हासिल की है। राकेश विश्नोई ने बिजनेस के साथ-साथ देश-विदेश की चोटियों पर तिरंगा फहराकर देश का नाम रोशन किया है। राकेश विश्नोई का लक्ष्य सभी 7 महाद्विपो की सबसे ऊंची चोटियों पर तिरंगा फहराना है।

कौन हैं राकेश
कराड़ा डूंगरपुर के व्यापारी राकेश विश्रोई बचपन से पर्वतारोही बनना चाहते थे। उन्होंने कॉलेज में पढ़ाई के दौरान पर्वतारोहण के लिए विशेष ट्रेनिंग ली। इसके बाद उन्होंने भारत के अरावली, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और नेपाल के पर्वतारोही के साथ मिलकर अलग-अलग समय में पहाड़ों पर चढ़ाई की।