सुख इंसान की सर्वश्रट अभिलाषा हे - आचार्य

राजस्थान बिश्नोई समाचार बाड़मेर श्वरण बेनिवाल बिश्नोई फूलण गांव में चल रही श्रीमद जम्भेवाणी भागीरथी कथा ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन श्रोताओं को सम्बोधन करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार जब मानसिक शांति प्राप्त होती है तथा पूर्ण तृप्ति का अहसास होता है वह सुख कहलाता है। सुख इन्सान के जीवन की सर्वप्रथम एवं सर्वश्रेष्ठ अभिलाषा है जिसके लिए वह जन्म से मृत्यु तक प्रयासरत रहता है तथा किसी भी प्रकार के उचित या अनुचित कार्य करके भी सुख की प्राप्ति की अभिलाषा रखता है। आचार्य ने कहा कि सुख की अभिलाषा में इन्सान ने आदिकाल से वर्तमान तक असंख्य अविष्कारों द्वारा संसार को आधुनिक रूप प्रदान किया है तथा भविष्य में और अधिक आधुनिक एवं सुखदायक बनाने की ओर अग्रसर है । इन्सान सुख के लिए कार्य करता है परन्तु दुःख उसको सताते रहते हैं क्योंकि संसार में जितने भी दुःख हैं उनका आधार किसी ना किसी प्रकार सुख ही होता है अर्थात सुख ही दुःख का जन्म दाता है । सुख की अभिलाषा में इन्सान ऐसे कार्य कर देता है जिसके कारण उसका जीवन कुछ सुखी और अधिक दुखी हो जाता है। उन्होंने बताया कि सुख के लिए इन्सान की तीन प्रकार की मानसिकता किर्याशील रहती हैं मन, भावना एवं कल्पना । दुःख एवं समस्याओं के कारण ज्ञात करने एवं वास्तविक सुख प्राप्त करने के लिए सुख का प्रभाव एवं परिणाम समझना आवश्यक होता है। इस दौरान सैकड़ो ग्रामीण मौजूद थे।

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