मुम्बई में 6 एवं 7 फरवरी, 2016 को आयोजित होने वाली राश्ट्रीय जाम्भाणी संगोश्ठी की तैयारियां पूरी

मुम्बई से (हरियाणा के ब्यूरो चीफ-पृथ्वीसिंह बैनीवाल बिष्नोई की रिपोर्ट्स)
विद्यानगरी परिसर, कलीना सांताक्रुज पष्चिम मुम्बई से प्रोफेसर एवं अध्यक्ष-हिन्दी विभाग, मुम्बई विष्वविद्यालय, डाॅ.करुणा षंकर उपाध्याय, श्री गुरु जम्भेष्वर चैरिटेबल सोसाईटी, नयागाँव (मुम्बई) महाराश्ट्र निवासी समस्त बिष्नोई समाज और राश्ट्रीय जाम्भाणी साहित्य अकादमी, बीकानेर के अध्यक्ष स्वामी श्री कृश्णा नन्द जी महाराज एवं महासचिव डा. सुरेन्द्र कुमार खीचड़ बिष्नोई ने बताया कि 6 एवं 7 फरवरी, 2016 को होने वाली राश्ट्रीय जाम्भाणी संगोश्ठी तैयारियां पूर्ण कर ली गई है।  इस दो दिवसीय संगोश्ठी में हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेष, दिल्ली, उत्तर प्रदेष, चण्डीगढ़, उतराखण्ड, गुजरात इत्यादि क्षेत्रों से बहुत बड़ी संख्या में विद्वतजनों, श्रोताओं, साधु-सन्तों और समाज के राजनैतिक नेताओं के पधारने की सम्भावना है।   

  29 धर्म-नियमों की आचार संहिता प्रदान कर श्री गुरु जाम्भोजी ने परम पावन षिरोमणी बिष्नोई पंथ का प्रवर्तन किया और जीया नै जुगति और मर्या नै देने वाली अनमोल वाण कही। उन्होंने अपनी कालजयी वाणी के माध्यम से जीवन और जगत के बारे में बहुत ही विस्तार से गूढ़ अर्थात अति गहरे विचार व्यक्त किए थे। श्री गुरु जाम्भोजी का प्रमुख उद्देष्य प्रकृति से सन्तुलन स्थापित करना और मानव का नैतिक एवं आध्यात्मिक उत्थान करना ही प्रमुख रूप से केन्द्र में निहित था। उनके द्वारा प्रतिपादित धर्म-नियम और अमरलोक की वाणी प्राणी मात्र का कल्याण करने वाली और सम्पूर्ण लोक के लिए मंगलकारी थी। स्वामी जी ने आगे बताया कि वर्तमान समय में उनके द्वारा स्थापित धर्म-नियम और वाणी सभी प्रकार की समस्याओं के समाधान के लिए रामबाण सिद्ध हो सकती है।     

   प्रोफेसर एवं अध्यक्ष-हिन्दी विभाग, मुम्बई विष्वविद्यालय, डाॅ.करुणा षंकर उपाध्याय तथा राश्ट्रीय जाम्भाणी साहित्य अकादमी, बीकानेर के अध्यक्ष स्वामी श्री कृश्णा नन्द जी महाराज एवं महासचिव डा. सुरेन्द्र कुमार खीचड़ बिष्नोई ने बताया कि आज यह अति खेद का विशय है कि इस महान वाणी एवं इन धर्म-नियमों का व्यापक एवं अपेक्षा के अनुसार प्रचार पसार नहीं हो पाया। इसी कमी को पूरा करने के प्रयास में हिन्दी विभाग मुम्बई विष्वविद्यालय, राश्ट्रीय जाम्भाणी साहित्य अकादमी, बीकानेर और श्री गुरु जम्भेष्वर चैरिटेबल सोसाईटी, नयागाँव (मुम्बई) यानि महाराश्ट्र निवासी समस्त बिष्नोई समाज द्वारा दो दिवसीय राश्ट्रीय जाम्भाणी साहित्य संगोश्ठी का आयोजन किया जा रहा। यह आयोजन गुरु जाम्भोजी की वाणी में प्रतिबिम्बित लोकमंगल विशय पर राश्ट्रीय संगोश्ठी मुम्बई विष्वविद्यालय  के हिन्दी विभाग एवं राश्ट्रीय जाम्भाणी साहित्य अकादमी, बीकानेर के संयुक्त तत्वाधान में 6 एवं 7 फरवरी, 2016 को विद्यानगरी परिसर, कलीना, सांताक्रुज (पष्चिम) मुम्बई विष्वविद्यालय के षंकरराव चव्हाण सभागार में आयोजित किया जायेगा। श्री गुरु जम्भेष्वर भगवान की वाणी में प्रतिबिम्बित लोक मंगल विशय पर आधारित दो दिवसीय राश्ट्रीय जाम्भाणी साहित्य संगोश्ठी 6 और 7 फरवरी, 2016 को आयोजित की जायेगी। 

  प्रोफेसर एवं अध्यक्ष-हिन्दी विभाग, मुम्बई विष्वविद्यालय, डाॅ.करुणा षंकर उपाध्याय तथा राश्ट्रीय जाम्भाणी साहित्य अकादमी, बीकानेर के अध्यक्ष स्वामी श्री कृश्णा नन्द जी महाराज एवं महासचिव डा. सुरेन्द्र कुमार खीचड़ बिष्नोई ने संयुक्त रूप से कार्यक्रम का पूर्ण विवरण देते हुए बताया कि हिन्दी विभाग मुम्बई विष्वविद्यालय, राश्ट्रीय जाम्भाणी साहित्य अकादमी, बीकानेर और श्री गुरु जम्भेष्वर चैरिटेबल सोसाईटी, नयागाँव (मुम्बई) यानि महाराश्ट्र निवासी समस्त बिष्नोई समाज द्वारा दो दिवसीय राश्ट्रीय जाम्भाणी साहित्य संगोश्ठी का आयोजन किया जा रहा। यह आयोजन गुरु जाम्भोजी की वाणी में प्रतिबिम्बित लोकमंगल विशय पर राश्ट्रीय संगोश्ठी मुम्बई विष्वविद्यालय  के हिन्दी विभाग एवं राश्ट्रीय जाम्भाणी साहित्य अकादमी, बीकानेर के संयुक्त तत्वाधान में 6 एवं 7 फरवरी, 2016 को विद्यानगरी परिसर, कलीना, सांताक्रुज (पष्चिम) मुम्बई विष्वविद्यालय के षंकरराव चव्हाण सभागार में आयोजित किये जा रहे इस संगोश्ठी समारोह में 6 फरवरी, 2016 को प्रातः 9 बजे से 10 बजे तक समारोह के लिए आने वालों का पंजीकरण किया जायेगा। उसके बाद 10 बजे से 12.30 बजे तक उद्घाटन सत्र चलेगा। उद्घाटन सत्र के तुरन्त बाद डेढ़ बजे से तीन बजे तक प्रथम सत्र चलाया जायेगा। इस दिन का सायं 3.30 बजे से सायं 5 बजे तक द्वितीय एवं अन्तिम सत्र आयोजित किया जायेगा।

  उन्होंने आगे बताया कि संगोश्ठी के दूसरे दिन 7 फरवरी, 2016 को प्रातः 9 बजे से 11 बजे तक तृतीय सत्र तथा 11.15 बजे से दोपहर एक बजे तक चतुथर्थ सत्र होगा। इसी प्रकार अपरान्न 2 बजे से सायं 3.30 बजे तक इस दिन का पंचम एवं अन्तिम सत्र होगा। इसके बाद सायं 3.30 बजे से 4.30 बजे तक इस दो दिवसीय राश्ट्रीय जाम्भाणी साहित्य संगोश्ठी का समापन समारोह आयोजित किया जायेगा। राश्ट्रीय जाम्भाणी साहित्य अकादमी, बीकानेर के उपाध्यक्ष डा. बनवारीलाल सहू ने दो दिवसीय राश्ट्रीय जाम्भाणी साहित्य संगोश्ठी 6 और 7 फरवरी, 2016 को भाग लेने हेतु पधारने वाले विद्वानोंके आवास एवं खान-पान की व्यवस्था आयोजको की ओर से की जायेगी। अन्त में उन्होंने बताया कि षोध पत्रों की प्रस्तुति के बाद उन पत्रों को पुस्तक के रूप में प्रकाषित किया जायेगा।

  राश्ट्रीय जाम्भाणी साहित्य अकादमी, बीकानेर के महासचिव डा. सुरेन्द्र कुमार बिष्नोई ने दो दिवसीय राश्ट्रीय जाम्भाणी साहित्य संगोश्ठी 6 और 7 फरवरी, 2016 को भाग लेने वाले विद्वानों को जानकारी देते हुए बताया कि इस प्रकार से सम्भावित उपविशय हो सकते हैं, जैसे- 1.गुरु जाम्भोजी और उनकी वाणी 2.लोक मंगल के साधक एवं बाधक तत्व 3.लोक और लोक मंगल-स्वरूप एवं क्षेत्र 4.लोक मंगल-गुरु जाम्भोजी की दृश्टि में 5.सन्तों की दृश्टि में लोक मंगल का स्वरूप् 6.जम्भवाणी में जीवन युक्ति एवं मोक्ष के उपाय 7.लोक मंगल का अनिवार्य तत्व और गुरु जाम्भोजी 8.गुरु जाम्भोजी की वाणी में परोपकार और त्याग का महत्व 9.गुरु जाम्भोजी की वाणी में नैतिक मूल्य 10.गुरु जाम्भोजी: पर्यावरण के प्रहरी 11.गुरु जाम्भोजी द्वारा प्रवर्तित बिष्नोई पंथ एवं मानवता की राह 12. जम्भवाणी में आडम्बरों एवं पाखण्डों का विरोध 13. गुरु जाम्भोजी नषा मुक्त समाज के पक्षधर 14.गुरु जाम्भोजी और सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन 15.लोक मंगल का आधार समन्वयवाद एवं गुरु जाम्भोजी 16. सर्वधर्म समभाव के पौशक गुरु जाम्भोजी 17.स्त्री उत्थान और गुरु जाम्भोजी 18.सुखी और स्वस्थ जीवन का आधार: अन्तर्बाह्य षुद्धि और गुरु जाम्भोजी 19.परमधन सन्तोश:गुरु जाम्भोजी की दृश्टि में 20.वर्तमान परिदृष्य में गुरु जाम्भोजी के सिद्धान्तों की प्रासंगिकता इत्यादि सम्भावित विशय हो सकते हैं।

   महासचिव ने दो दिवसीय राश्ट्रीय जाम्भाणी साहित्य संगोश्ठी 6 और 7 फरवरी, 2016 की जानकारी देते हुए आगे बताया कि ”जीव दया पालणी-रूंख लीलो नहीं घावै, क्षिमंा रूप तप कीजे, दया धर्म थापिले, उतम कुळी का उतम न होयबा कारण क्रिया सारूं,अड़सठ तीर्थ हिरदा भीतर बाहर लोकां चारूं, इत्यादि गुरु जाम्भोजी की वाणी के आधार पर या अन्य इनसे मिलता जुलता उपविशय भी निर्धारित कर आलेख लिखा जा सकता है परन्तु वह उप-विशय मुख्य विशय से सम्बन्धित होना चाहिए। तैयारी के बाद षोध पत्र राश्ट्रीय जाम्भाणी साहित्य अकादमी के पते पर भेजा जाना चाहिये।  

(पृथ्वीसिंह बैनीवाल बिष्नोई)      
 सस्थापक सदस्य राश्ट्रीय जाम्भाणी साहित्य अकादमी, बीकानेर तथा संयुक्त सचिव एवं प्रैस प्रभारी,श्री बिष्नोई सभा, पंचकूला,म.नं. 189-एफ, सैक्टर-14, पंचकूला-134113 (हरियाणा) मो.नं.-94676-94029

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