जैसलमेर बिश्नोई समाचार पोकरण उपखंडक्षेत्र में हिरणों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। जिसके चलते सड़क दुर्घटनाओं में मरने वाले हिरणों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। हिरण बाहुल्य क्षेत्र कहलाने वाले गांव खेतोलाई, धोलिया, ओढाणियां में हिरणों की संख्या सर्वाधिक है। राज्य पशु के खिताब से नवाजे चिंकारा को वन विभाग के अधिकारियों द्वारा किसी भी प्रकार कोई सुरक्षा नहीं दी जा रही है। वहीं दूसरी ओर कई हिरण वाहनों की चपेट में आकर घायल हो जाते हैं। कहीं पर शिकारियों द्वारा भी हिरणों को पानी पीते के समय भी गोली मारकर हत्या कर देते है। जिसके चलते के राज्य पशु की दिनों दिन संख्या कम होती हो रही है। वन विभाग के अधिकारियों कार्मिकों द्वारा समय- समय पर सर्वे नहीं करने के कारण आवारा पशुओं द्वारा इन हिरणों को शिकार बना लिया जाता है।
सड़कदुर्घटना में सर्वाधिक होती घटनाएं
रात्रिहोते ही सड़क मार्ग पर आवारा पशुओं की संख्या बढ़ जाती है। रात्रि में वाहन चालकों द्वारा दी जाने वाली तेज रोशनी से हिरण एक बार से नेत्रहीन हो जाते हैं तथा तेजी से अपने ओर आने वाले वाहनों को नहीं देख पाते हैं। हिरण वाहनों की चपेट में आकर मौत के मुंह में समा जाते है। पिछले दो माह में वाहनों की चपेट में आने से लगभग 10 से अधिक हिरणों की अकाल मौत हो गई। लेकिन अभी तक वन विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। हिरणों को राष्ट्रीय राजमार्ग से दूर रखने के संबंध में कई बार ग्रामीणों द्वारा प्रशासन से क्षेत्र की तारबंदी करने की अपील की गई है। लेकिन प्रशासन द्वारा इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं करने का खामियाजा आवारा मूक पशुओं को उठाना पड़ रहा है।
शिकारियोंने भी हिरणों पर मारी सांध
उपखंडक्षेत्र में शिकारियों द्वारा चिंकारा को देखते ही उनके पीछे पड़ जाते है। हिरण पर अपनी टॉर्च देकर हिरण को नेत्रहीन हो जाते बाद में उनके पर गोली मार कर हत्या कर देते हैं। उसके बाद शिकारियों द्वारा हिरण की चमड़ी खोलकर आगे बेचने का काम करते है। एेसी घटनाएं हर रोज देखने को मिलती हैं। उसके बाद भी वन विभाग द्वारा कोई कार्रवाई करता नहीं नजर रहे है। ग्रामीणों ने बताया कि 21 जून 2014 को केलावा गांव में शिकारियों द्वारा हिरण को मारकर हडि्डयां बबूल की झाड़ियों में फेंकी हुई मिली। इसी प्रकार 20 जून 2014 को लोहारकी गांव में शिकारियों द्वारा मांस पकाते पकड़े गए थे। 25 जून को खेतोलाई गांव में शिकारियों गोली मारकर हत्या की गई। 23 जुलाई 14 को पुरोहितसर गांव में भी शिकारियों द्वारा हिरण पर गोली चलाकर हत्या कर दी गई थी। बीलिया गांव में 8 सितंबर को दो हिरणों को कुतों ने भी काट कर हिरणों की हत्या कर दी। इसके बाद भी वन विभाग मूकदर्शक बनी हुई है।
वाहनोंकी चपेट में आने से कई हिरणों की मृत्यु हो गई है। इस संबंध में वन विभाग के अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई नहींं की गई है। वन विभाग द्वारा बरती जा रही लापरवाही को विश्नोई समाज द्वारा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जितेन्द्रविश्नोई, अध्यक्ष, पर्यावरण सरंक्षण समिति खेताेलाई
उपखंडक्षेत्र के चिंकारा की संख्या दिनों दिन घट रही वहीं वन विभाग द्वारा इस ओर कोई ध्यान नहीं देने के शिकारियों द्वारा प्रतिदिन हिरणों का शिकार कर देते है। रविन्द्रकुमार विश्नोई, वन्य प्रेमी
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