अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा के सदस्य एवं हजकां पार्टी के युवा प्रदेश सचिव श्री अनिल ज्याणी ने शहीद अंम्रता देवी खेजड़ली ३६३ शहीदों के यादगार मे पोधारोपन किया

सिर साँटे रूख रहे तो भी सस्तो जाण
अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा के सदस्य एवं हजकां पार्टी के युवा प्रदेश सचिव श्री अनिल ज्याणी ने शहीद अंम्रता देवी खेजड़ली ३६३ शहीदों के यादगार मे आज दिनांक 16/09/2015 को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भुना ( फतेहाबाद) मे पोधारोपन किया एवं बच्चो को शहीद अंम्रता देवी खेजड़ली के बारे मे सम्बोधित किया , विधालय के बच्चो को  अपने अपने घरों मे एक एक पोधा लगाने की संपत दिलाई,
यह पोधारोपन अभियान (कार्यक्रम) आगे के लिए जारी रहेगा, श्री ज्याणी साहब ने बोलो की पुरे हरियाणा को  हरा भरा करने की मिसाइल को कायम करना एवं अभी मौका मिला है। ज्यादा से ज्यादा पर्यावरण (संरक्षण) प्रेमीयो को ज्याणी साहब ने बिड़ा उठाया को क्हा है,

खेजड़ली बलिदान :- पेड़ो की रक्षा के लिए प्राण न्यौछावर करने की रोमांचक और विश्व प्रसिद घटना खजडली बलिदान की है यह घटना राजस्थान में जोधपुर जिले 25 किमी दूर खेजड़ली गाँव मैं घटित हुयी थी जो खेजड़ली के खड़ाने के नाम से प्रसिद हुयी है
सम्वन्त 1787 में जोधपुर के माहाराजा अभय सिंह थे और उनके राज में राज्य में आर्थिक इस्थ्ति काफी कमजोर थी और महेल का निर्माण भी करवाना जरूरी था इसलिए महाराजा ने चुना पकाने के लिए लकड़ी की खोज के लिए लोगो को आस पास के गाँवो में इधर उधर अपने राज्य से भेजा और लोगो ने सुचना दी की खेजड़ली गाँव में बहुत सारे खेजड़ी के पेड़ खड़े है उस समय गिरधरदास भण्डारी राजा का हकीम था माहाराजा ने अपने हकीम गिरधर दास भण्डारी को ही पेड़ काटने का कार्य सौंपा था तो राजा की आज्ञा से भण्डारी कारिन्दों एव् मजदूरो को लेकर खेजड़ली गाँव में पहुँच गया वहॉ पहुँच कर उसने अपने मजदूरो को खेजडी के पेड़ काटने की आज्ञा देदी पेड़ो की कटने की कुल्हाड़ी की आवाज सुनकर बिशनोई वहॉ पहुँच गए और पेड़ो की का विरोध किया तो भण्डारी ने कहा आपको अगर पेड़ इतने ही प्यारे है तो इन पेड़ो को बचाने के लिए टेक्स के रूप में धन देना होगा जिससे हम महेल के लिए खर्च करेगे। तब बिशनोई समाज के लोगो ने कहा की हम धन भी नही देगे और पेड़ भी नही काटने देगे हम हमारी जान देदेगे लेकिन धर्म को कलंकित नही होने देगे जब बिशनोई लोगो ने भंडारी को पेड़ नही काटने दिए तो भण्डारी वापिस राजा के पास आया और उसने आकर सारी कहानी बता दी. राजा काफी परेसान हुवा और उसने आसपास के गाँवो से अनेक वर्गो के लोगो की ऐक बैठक बुलाई और उनसे सलहा ली और अभी लोगो ने राजा को पेड़ नही काटने की सलहा दी और राजा ने स्वीकार कर ली उनकी सलहा लेकिन गिरधरदास भण्डारी को ये निर्णय ठीक नही लगा. और जादा आदमियो को लकर भंडारी वापिस खेजड़ली पहुँच गया. लेकिन बिशनोई लोगो को पता था की भण्डारी बहुत बड़ा घमण्डी है और वो जरूर वापिस पेड़ काटने आयेगा तो बिशनोई समाज के लोगो ने ये जानकारी 84 गावो में पहुँचायी और सभी को बताया की खेजड़ली गॉव में गिरधरदास भंडारी कभी भी पेड़ काटने आ सकता है और हमने इसका विरोध करना है इसलिए बिशनोई बन्धू जादा से जादा मात्रा में जल्दी से जल्दी खेजड़ली गाँव में पहुँचे । इस सन्देश के मिलते ही बिशनोई समाज के लोग बहुत सख्या में एकत्रित हुवे जेसे ही भण्डारी वापिस खेजड़ली गॉव में पेड काटने पहुँचा तो उसने भारी संख्या में बिशनोई लोगो का विरोध देखकर भौचक रह गया लेकिन वे बहुत बड़ा निर्दयी था उसने अपने लोगो को पेड़ काटने का आदेश दिया और वो पेड़ कटवाने लग गया जब बिशनोई लोगो ने भण्डारी को बोला की की आप पेडो की कटाई मत करो हम पेड़ नही काटने देगे चाहे हमारी जान क्यों नही चली जाई लेकिन भंडारी नही रुका . बिशनोई लोगो ने हमेशा अहिंसा का परिचय दिया है और यहाँ भी उन्होंने जितने पेड़ खड़े थे उनके चिपकने का निर्णय किया और कहा हम पेड़ नही कटने देगे अगर आपको ऐक पेड़ भी काटना है तो पेहेले हमारे को काटना पड़ेगा। इस विरोध में सबसे आगे महिलाओ ने अपनी पर्यावरण की रक्षा और प्यार को दरसाया अमृता बिशनोई ने सबसे पेहेले अपना बलिदान दिया और उसके बाद ऐक के बाद ऐक सभी लोग पेड़ो के चिपक गए लेकिन निर्दयी भण्डारी ने इन सभी लोगो को काटता रहा लेकिन बिशनोई लोगो का जोश और पर्यावरण प्यार इतना ज्यादा था की बिशनोई लोग पेड़ो के उछल उछल के चिपक रहे थे खेजड़ली में बिशनोई लोगो के पर्यावरण को बचाने इस बलिदान की घटना से पूरा गॉव लहूलुहान होकर खून की नदियां बेहेने लग गयी और इस घटना का जेसे ही महाराजा अभय सिंह जी को पता चला तब उन्होंने तुरन्त प्रभाव् से पेड़ो की कटाई को रुकवाया और साथ ही माहाराजा ने ये आदेश भी भेजा की भवष्ये में बिश्नोइयों के गाँवो में कभी पेड़ नही काटे जायेगे महाराजा के पेड़ो की कटाई रुकवाने के पुर्व यहाँ 363 बिशनोई स्त्री – पुरुष शहीद हो चुके थे इस घटना की पूर्ण आहूति विक्रम समत 1787 को भादो सुदी दसमी को हुयी थी आज ही बिशनोई समाज इन शहीदों को याद करता है और इनकी याद में यहाँ खेजड़ली गॉव जोधपुर से 25 किमी दुरी पर है यहाँ शहीदी स्मारक बनाया गया और हर वर्ष मेला लगता है और इन शहीदों को श्रदांजलि दी जाती है
न्यूज रघुनाथ ऐचरा बिश्नोई

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